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आराधिका राष्ट्रीय मंच के स्थापना दिवस पर ‘सुरभित मन’ का विमोचन और कवि सम्मेलन संपन्न

आराधिका राष्ट्रीय मंच के स्थापना दिवस पर ‘सुरभित मन’ का विमोचन और कवि सम्मेलन संपन्न

आराधिका साहित्यिक मंच (पंजी.) के प्रथम स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भव्य आनलाइन काव्य गोष्ठी/ पुस्तक विमोचन का आयोजन किया गया। नव संवत्सर और नवरात्रि के शुभारंभ के अवसर पर 30 मार्च 2025, संध्या 3:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक लगभग 5 घंटे तक गतिमान रहकर आयोजित काव्य गोष्ठी भव्यता के साथ संपन्न हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता का डॉ ओम ऋषि
भारद्वाज (एटा उ. प्र.) ने की। जबकि 18 वरिष्ठ कवियों/कवयित्रियों को बतौर मुख्य अतिथि/विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंचासीन किया गया।
काव्यगोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ कवि मनोहर
सिंह चौहान मधुकर की वाणी वंदना से हुआ। निधी बोथरा जैन ने माता रानी की वंदना और स्वागत गीत काशी हिंदी विद्यापीठ के कुल सचिव/ वरिष्ठ कवि इंद्रजीत तिवारी निर्भीक ने प्रस्तुत किया। तत्पश्चात निधी बोथरा जैन, सतीश शिकारी, महासचिव सुधीर श्रीवास्तव, सलाहकार अनिता बाजपाई (वर्धा) ने सभी साहित्यकारों का अभिनन्दन करते हुए मंच के एक वर्ष की यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी का स्वागत अभिनंदन कर बधाइयां शुभकामना दी।
प्रणय साहित्यिक दर्पण के संस्थापक इंजी. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव जी प्रणय ने प्रस्तावना रखी।
इसके बाद आराधिका राष्ट्रीय मंच द्वारा प्रकाशित साझा संकलन ‘सुरभित मन’ का विमोचन मंच संस्थापिका/संपादिका डा. निधी बोथरा जैन, पटल पदाधिकारियों और वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा किया गया।
तत्पश्चात काव्य पाठ का सिलसिला शुरू हुआ।कुल 45 से अधिक कवियों कवयित्रियों ने मंच के स्थापना दिवस विषयक विविध मनमोहक प्रस्तुतियों/काव्यात्मक शुभकामनाओं से काव्य गोष्ठी को ऊंचाइयों तक पहुँचाया। सतीश शिकारी, बसंत श्रीवास एवं अनीता बाजपाई ने कुशल मंच संचालन के द्वारा काव्यगोष्ठी को सफलता प्रदान की।
आयोजन को सफल बनाने में मंच पदाधिकारियों/ वरिष्ठ कवियों/ कवयित्रियों का हमेशा की तरह सराहनीय योगदान रहा। सभी पदाधिकारियों, विभिन्न पटलों के संस्थापकों/अध्यक्षों/पदाधिकारियों सहित शुभचिंतकों की सक्रिय, गरिमामय उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाने में सफलता प्राप्त हुई।
अंत में संस्थापिका डा. निधी द्वारा सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का आभार ज्ञापन और अध्यक्ष डा. ऋषि के द्वारा गोष्ठी विराम करते हुए भव्य काव्य गोष्ठी के विराम की घोषणा की।

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