चैत्र नवरात्रि, विक्रम संवत् २०८२, का कल्पकथा परिवार ने किया काव्य अभिनन्दन
“!! चैत्र नवरात्रि, विक्रम संवत् २०८२, का कल्पकथा परिवार ने किया काव्य अभिनन्दन !!”
देश और समाज में सनातन संस्कृति, हिन्दी भाषा, सद साहित्य, हेतु समर्पित कल्पकथा परिवार के संस्थापक पवनेश मिश्रा ने बताया कि रविवार दिनाँक ३० मार्च २०२५ को अपराह्न ४.३० बजे से कल्पकथा साहित्य संस्था की १९०वीं ऑनलाइन काव्यगोष्ठी में विक्रम संवत् – २०८२, चैत्र नवरात्रि, के अभिनंदन में देश भर से जुड़े सुधि सृजनकारों ने चार घंटे से अधिक समय तक काव्यगंगा प्रवाहित की।
दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी की अध्यक्षता के कार्यक्रम का शुभारंभ चोगलमसर लेह लद्दाख से जुड़ीं श्रीमती ज्योति राघव सिंह जी द्वारा गुरु वंदना, गणेश वंदना, एवं सरस्वती वंदना, के साथ हुआ।
कोंच उप्र के आशुकवि भास्कर माणिक जी के संचालन में सनातन संस्कृति की गौरवपूर्ण प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक विधियों, विद्वत प्रश्नावली, के साथ बाल साहित्य, पर डॉ ऊषा पाण्डेय शुभांगी, विजय रघुनाथराव डांगे, डॉ अंजू सेमवाल, डॉ मंजू शकुन खरे, दुर्गादत्त मिश्रा बाबा, पुष्पा साहू मीरा, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, रानी शर्मा, ज्योति राघव सिंह, डॉ जया शर्मा प्रियम्वदा, शोभा प्रसाद, भास्कर सिंह माणिक, संध्या श्रीवास्तव साँझ, राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्रा, ने काव्य पाठ किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी ने आयोजन और रचनाकारों की प्रशंसा करते हुए हमारे धार्मिक प्रतीक चिन्हों के सम्मान, और गर्मी में पशु पक्षियों के लिए व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक रूप से पानी की व्यवस्था करने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम के अंत में नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े श्री विजय रघुनाथराव डांगे जी ने “सर्वे भवन्तु सुखिन:” शान्ति पाठ के साथ के साथ सभी का आभार व्यक्त किया।